Tuesday, January 23, 2024

तुलसीदास 🆚 संत रैदास दोहा‌

💙 JAY BHIM💙
    
संत तुलसीदास 




पूजहिं विप्र‌ सकल गुणहीना,
 शूद्र न पूजहिं ज्ञान प्रवीणा ।।




 संत रैदास



रैदास बाभन मत पूजिए , जो होवे गुणहीन ,
 पूजिए चरण चंडाल के जो हो गुण प्रवीण।।

 बोधिसत्व रैदास क्या चाहते थे? 


जीवन चारी दिनों का मेला रे,

 बाभन झूठा, वेद भी झूठा, झूठा ब्रह्म अकेला रे।।


मंदिर भीतर मूरति बैठी, पूजति बाहर चेला रे।

लड्डू भोग चढावति जनता, मूरति के ढिंग केला रे।।


पत्थर मूरति कछु न खाती, खाते बांभन चेला रे।

जनता लूटति बांभन सारे, प्रभु जी देति न अधेला रे।।


पुन्य - पाप या पुनर्जन्म का, बांभन दीन्हा खेला रे।

स्वर्ग - नर्क बैकुंठ पधारो, गुरू शिष्य या चेला रे।

बाभन जाति सभी बहकावे, जनह तंह मचै बबेला रे।।


छोडि के बांभन आ संग मेरे, कह विद्रोही अकेला रे।।


 रैदास

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