Thursday, January 18, 2024

ठाकुर का कुआँ कविता ओमप्रकाश वाल्मीकि

 💙JAY BHIM💙



ओमप्रकाश वाल्मीकि



चूल्हा मिट्टी का 
मिट्टी तालाब की 
तालाब ठाकुर का। 
भूख रोटी की 
रोटी बाजरे की 
बाजरा खेत का 
खेत ठाकुर का। 
बैल ठाकुर का 
हल ठाकुर का 
हल की मूठ पर हथेली अपनी 
फ़सल ठाकुर की। 
कुआँ ठाकुर का 
पानी ठाकुर का 
खेत-खलिहान ठाकुर के 
गली-मुहल्ले ठाकुर के 
फिर अपना क्या? 
गाँव? 
शहर? 
देश? 


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