Wednesday, January 24, 2024

कौन हैं जननायक कर्पूरी ठाकुर, मरोणोपरांत भारत रत्न से किये जाएंगे सम्मानित

 🖋📚💙JAY BHIM💙📚🖋

जननायक कर्पूरी ठाकुर  



Biography
   

पूरा नाम कर्पूरी ठाकुर

अन्य नाम जननायक

जन्म 24 जनवरी, 1924

जन्म भूमि पितौंझिया (कर्पूरी ग्राम), समस्तीपुर, बिहार

मृत्यु 17 फरवरी, 1988

नागरिकता भारतीय प्रसिद्धि वह जन नायक माने जाते थे

पार्टी सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय क्रान्ति दल, जनता पार्टी, लोक दल

पद बिहार के 11वें मुख्यमंत्री

कार्य काल 22 दिसंबर, 1970 से 2 जून, 1971 तथा 24

 जून, 1977 से 21 अप्रैल, 1979 तक दो बार बिहार के 

मुख्यमंत्री पद पर रहे।

अन्य जानकारी कर्पूरी ठाकुर आजादी से पहले 2 बार

 और आजादी मिलने के बाद 18 बार जेल गए।

कर्पूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल में

 समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गाँव, जिसे अब

 'कर्पूरीग्राम' कहा जाता है, में नाई जाति में हुआ था।

 उनके पिताजी का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी

 का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था। इनके पिता गांव के

 सीमान्त किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा बाल

 काटने का काम करते थे।

दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे और एक बार भी अपना

 कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए

 बिहार में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का रास्ता साफ

 किया था। उन्होंने कभी खुद को अपने संकल्प से

विचलित नहीं होने दिया। इसके लिए उन्हें अपनी सरकार

 की कुर्बानी भी देनी पड़ी। बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्ष

 में अंग्रेजी की अनिवार्यता को भी उन्होंने ही खत्म किया था।

स्वतंत्रता आंदोलन में किरदार


समस्तीपुर के पितौझिया गांव में जन्मे कर्पूरी ठाकर ने

 1940 में पटना मैट्रिक परीक्षा पास की थी। उस वक्त

 देश गुलाम था। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद कर्पूरी

 ठाकुर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने

 समाजवाद का रास्ता चुना और आचार्य नरेंद्र देव के

 साथ समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए। 1942 में महात्मा

 गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और उन्हें

 जेल भी जाना पड़ा।


1952 में जीता पहला चुनाव


कर्पूरी ठाकुर ने 1952 में पहला विधानसभा चुनाव जीता

 था। इसके बाद कभी भी वे विधानसभा चुनाव नहीं हारे।

 वे अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने

 सामाजिकि मुद्दों को अपने एजेंडे में आगे रखा। वे जनता

 के सवाल को सदन में मजबूती से उठाने के लिए जाने

 जाते थे। समाज के कमजोर तबकों पर होनेवाले जुल्म

 और अत्याचार की घटनाओं को लेकर कर्पूरी ठाकुर

 सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर देते थे।


पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री


वे बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे हैं। पहली

 बार दिसंबर 1970 से जून 1971 तक वे मुख्यमंत्री रहे। वे

 सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय क्रांति दल की सरकार में

 सीएम बने थे। सीएम बनने के बाद उन्होंने सरकारी

 नौकरियों में पिछड़ों को आरक्षण दिया था। वे दूसरी बार

 जनता पार्टी की सरकार में जून 1977 से अप्रैल 1979

 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे।

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