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| जननायक कर्पूरी ठाकुर |
स्वतंत्रता आंदोलन में किरदार
समस्तीपुर के पितौझिया गांव में जन्मे कर्पूरी ठाकर ने
1940 में पटना मैट्रिक परीक्षा पास की थी। उस वक्त
देश गुलाम था। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद कर्पूरी
ठाकुर आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने
समाजवाद का रास्ता चुना और आचार्य नरेंद्र देव के
साथ समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए। 1942 में महात्मा
गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और उन्हें
जेल भी जाना पड़ा।
1952 में जीता पहला चुनाव
कर्पूरी ठाकुर ने 1952 में पहला विधानसभा चुनाव जीता
था। इसके बाद कभी भी वे विधानसभा चुनाव नहीं हारे।
वे अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने
सामाजिकि मुद्दों को अपने एजेंडे में आगे रखा। वे जनता
के सवाल को सदन में मजबूती से उठाने के लिए जाने
जाते थे। समाज के कमजोर तबकों पर होनेवाले जुल्म
और अत्याचार की घटनाओं को लेकर कर्पूरी ठाकुर
सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर देते थे।
पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री
वे बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे हैं। पहली
बार दिसंबर 1970 से जून 1971 तक वे मुख्यमंत्री रहे। वे
सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय क्रांति दल की सरकार में
सीएम बने थे। सीएम बनने के बाद उन्होंने सरकारी
नौकरियों में पिछड़ों को आरक्षण दिया था। वे दूसरी बार
जनता पार्टी की सरकार में जून 1977 से अप्रैल 1979
तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे।

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