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| कमल जीत चौधरी की कविता |
किताबेंबंद होती जा रही हैंबिना खिड़कियों-रोशनदानवाले कमरों मेंडायरियाँखुली हुई फड़फड़ा रही हैंबीच चौराहों मेंक़लमबची है सिर्फ़हस्ताक्षर के लिए।
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| कमल जीत चौधरी की कविता |
किताबेंबंद होती जा रही हैंबिना खिड़कियों-रोशनदानवाले कमरों मेंडायरियाँखुली हुई फड़फड़ा रही हैंबीच चौराहों मेंक़लमबची है सिर्फ़हस्ताक्षर के लिए।
HELLO,
JAY BHIM
EDUCATE,AGITATE AND ORGANISE
PRAVEEN CHIEF :- BE EFFECTIVE NOT GOOD .
READERS ARE LEADERS.
TEAM R&F (RESPECT & FREEDOM )
💙Jay bhim💙 नारी के लिए , 1. जितना कोमल बन रही, उतना शोषण होय। सबला हो- अबला नहीं, इज्जत को मत खोय।। 2. जितना तुम पीछे हटत, दाबत पुर...
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