Thursday, January 18, 2024

" किताबें , डायरियाॅं और कलम " कमल‌‌‌ जीत चौधरी की कविता 📚🖋

💙JAY BHIM 💙 

कमल‌‌‌ जीत चौधरी की कविता



किताबें 

बंद होती जा रही हैं 

बिना खिड़कियों-रोशनदान 

वाले कमरों में 

डायरियाँ 

खुली हुई फड़फड़ा रही हैं 

बीच चौराहों में 

क़लम 

बची है सिर्फ़ 

हस्ताक्षर के लिए। 

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